Monday, 26 June 2017

माँ सरस्वती की उत्पत्ति माँ महाकाली ने की है

१. )शंका : क्या माँ सरस्वती की उत्पत्ति ब्रह्मा ने की है ?
क्या माँ सरस्वती ब्रह्मा की बेटी है ?
उत्तर : नहीं
भगवान् ब्रह्मा के ऊपर कोई भी सांसारिक ब्रह्मा का विधान लागु नहीं होता है | इसलिए कोई सांसारिक सम्बन्ध नहीं होता है |  गणेश, शिव , विष्णु , ब्रह्मा , दुर्गा (लक्ष्मी, सरस्वती, काली) इत्यादि पर  सांसारिक सम्बन्ध नहीं होता है |  ये एक दूसरे के आह्वान  पर प्रकट होते है | कार्य में सहायता करते है |
भगवान् ब्रह्मा ने कल्पना से ही संसार बनाया है | ब्रह्मा ने कल्पना से ही सबको पैदा किया है न की सम्बन्ध से इन्होने मानस पुत्र को जन्म दिया है | अतः ब्रह्मा की शक्ति माँ सरस्वती माँ गायत्री और गणेश जी है जिनके सहायता से वो विधान लिखते है | भगवन विष्णु की शक्ति लक्ष्मी है | जो पालन पोषण में सहायता करती है | महदेव की शक्ति कालि है जो शिव को प्रलय संहार में सहायता करती है |
दुर्गा सप्तशती में रहस्य में बताया गया है | माँ सरस्वती की उत्पत्ति माँ महाकाली ने की है |ब्रह्मा की सृष्टि की कल्पना कर रहे हो वो ब्रह्मा की सृष्टि से ऊपर है | इसलिए वास्तव में न तो देवता हैं , न असुर, न मनुष्य हैं न तिर्यक् ( मनुष्य से नीची – पशु , पक्षी आदि किसी ) योनीके प्राणी हैं । न वे स्त्री हैं, न पुरुष और न नपुंसक हीं हैं । नवे ऐसे कोई जीव हैं , जिनका इन तीनों ही श्रेणियों में समावेश न हो सके । न वे गुण हैं न कर्म, न कार्य हैं न तो कारण ही। सबका निषेध हो जानेपर जो कुछ बचा रहता है, वही उनका स्वरुप है तथा वे ही सब कुछ हैं।इसलिए कोई भी सांसारिक सम्बन्ध माँ सरस्वती पर लागू नहीं होता है| 
२ .) शंका : क्या माँ सीता का अग्नि परीक्षा ली थी और राम ने धोबी के कहने पर त्याग किया था ?
उत्तर : नहीं
 माँ सीता का अग्निपरीक्षा एक झूठ मात्र है | जो वाल्मीकि रामायण में ,महाभारत और मनुस्मृति में छेड़खानी के कारन हुई थी |
माँ सीता के स्मरण मात्र से अग्नि शीतल हो जाती है | वीर हनुमान माँ सीता के आशीर्वाद से लंका दहन किये और अग्नि को माँ सीता ने ही अग्नि को हनुमान के लिए शीतल हो जाने को कहा था |
माँ सीता के आशीर्वाद से ही हनुमान जी अजर अमर गुणनिधान हो गए |

सुन्दर कांड दोहा
अजर अमर गुणनिधि सूत होहु | करहुँ बहुत रघुनायक छोहू |  हनुमान

हनुमान चालीसा
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता | अस बर दीन जानकी माता |

क्यों माँ सीता ने लक्ष्मण रेखा लांघी , माँ सीता का रावण ने अपहरण कैसे कर लिया और माँ सीता ने रावण को दंड क्यों नहीं दिया ?

सत्य : माँ सीता माँ मंदोदरी के बेटी है  | जब माँ सीता का जन्म हुआ तो आकाशवाणी हुई की हे मंदोदरी तेरी पुत्री तेरे पति  रावण का मौत कारन बनेगी | इसलिए रावण ने माँ सीता को राक्षसों द्वारा राजा जनक के राज्य में धरती में घड़े में रख कर गाड़ दिया था | जब  राजा जनक ने हल चालयी तो घड़े में माँ सीता मिली थी |राजा जनक माँ सीता के धर्म पिता थे और रावण पिता थे |
इसलिए अपने पिता को अपने सामने पाकर और भीख मांगते देख लक्ष्मण रेखा लांघी थी | अपने पिता को मना नहीं किया और न ही युद्ध किया | इसलिए बारम्बार भगवान् राम ने सीता को लौटाने के लिए अनुरोध किये |

रावण को पता था जिस दिन उसकी पुत्री सीता लंका में कदम रखेगी | लंका में राक्षस का नाश होगा | इसलिए रावण ने अपनी बेटी सीता को लंका ले आया था | जिससे राक्षस का अंत और भगवान् श्री राम के हाथो मुक्ति मिले | जिसका माँ मंदोदरी, सीता के नाना(मंदोदरी के पिता ) चाचा कुम्भकर्ण और चाचा विभीषण ने विरोध किया था |   अतः मंदोदरी के आज्ञानुसार महल के बाहर ही माता सीता को रखा गया था | अपने माता और पिता के घर रहने के कारन सीता की पवित्रता पर सवाल करना ही गलत और अधर्म ही है |

माँ सीता राजा अपने पिता जनक , महर्षि वसिष्ठ, तीनो महारानी कौसल्या सुमित्रा, कैकयी के आशीर्वाद और खुद की इक्षानुसार और भगवान् श्रीराम की अनुमति से गयी थी | महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में गयी थी |
उस समय आश्रम प्रथा थी | बच्चे के देखभाल और अच्छे संस्कार के लिए गयी थी | बच्चे गर्भावस्था में सिख जाते है | अभिमन्यु ने गर्भ में ही चक्रव्यूह तोडना अर्जुन से सीखा था |


धोबी नाम की कोई शब्द नहीं था | त्रेता युग में जाती प्रथा नहीं थी | जाती प्रथा कलियुग में आया | जाती प्रथा मुग़ल ने और वर्ण व्ययस्था राजा भोज ने बनाया था | जो परिवर्तनीय थी | अतः यह भ्रामक और झूठ है |
मनु स्मृति ,वालमीकि रामायण में उत्तरकाण्ड और महाभारत में छेड़खानी हुई है

३. ) शंका : क्या माँ द्रौपदी के पांच पति थे ?
उत्तर : नहीं
माँ द्रौपदी पांचाल नरेश की पुत्री थी | जिससे उनका नाम पांचाली पड़ा था |
वामपंथी और अधर्मी ने हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए झूठ फैलाया था |
४.) शंका : क्या शिव की पारवती और काली पत्नी ,माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी और ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती है ?
उत्तर : ये देवी शक्ति है | जिन्हे समय समय पर ब्रह्मा विष्णु महेश आह्वान करते है | आप पत्नी को सहयोगी समझ सकते है |
ब्रह्मा वेद की रचना और सृष्टि के लिए कानून लिखते है | जिसे भगवान् गणेश और माँ सरस्वती सहयोग करती है | इसलिए माँ सरस्वती को ब्रह्मा की शक्ति माना जाता है |
भगवान् विष्णु पालन पोषण माँ लक्ष्मी के सहयोग या शक्ति से करते है | इसलिए माँ लक्ष्मी को भगवान् विष्णु की संगिनी माना गया है |
भगवान् विष्णु स्वयं लक्ष्मी धन्वंतरि अमृत मोहिनी के रूप में प्रकट लिए थे |
भगवान भोलेनाथ संसार के मालिक और संहारकरता है | माँ पारवती को तप के समय और माँ काली को विनास के समय संगिनी शक्ति कहा गया है |
अतः आप पत्नी को शक्ति या सहयोगी के लिए समझ सकते है | लेकिन ब्रह्मा के श्रष्टि के ऊपर नर नारी जैसी कोई प्रथा नहीं है |
५.) राधा से कृष्ण की शादी क्यों नहीं हुई |
उत्तर : माँ राधा भगवान् श्री कृष्ण की अन्तरंगिणी माया है | जो समय आने पर श्री कृष्ण स्वयं माँ राधा के रूप में हर युग में प्रकट होते है | माँ राधा रूप श्री कृष्ण का मंगलकारी है जिसे योगी और भक्त्जन समझ सकते है | साधारण जन माँ रुक्मिणी को राधा समझ सकते है | माँ रुक्मिणी माँ लक्ष्मी और माँ राधा तीनो श्री कृष्ण के ही रूप और शक्ति है |

भगवान् के अनन्त रूप है | गणपति ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा  एक दूसरे से प्रकट और एक दूसरे में व्याप्त होते रहते है | अन्नंत सूर्य है | भगवान् हमारी तर्क शक्ति से बाहर है |
भगवान् को हम नमन करते है |
त्राहि मा शरणागतम |

बोलो राधे राधे |

दुर्गा सप्तशती रहस्य 


Friday, 23 June 2017

प्रकाश की गति

प्रकाश की गति : ऋग्वेद में मोजूद हे | Speed of light in Rigveda
माना जाता है की आधुनिक काल में प्रकाश की गति की गणना Scotland के एक भोतिक विज्ञानी James Clerk Maxwell (13 June 1831 – 5 November 1879) ने की थी ।
जबकि आधुनिक समय में महर्षि सायण , जो वेदों के महान भाष्यकार थे , ने १४वीं सदी में प्रकाश की गति की गणना कर डाली थी जिसका आधार ऋग्वेद के प्रथम मंडल के ५ ० वें सूक्त का चोथा श्लोक था ।
तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कृदसि सूर्य ।
विश्वमा भासि रोचनम् ॥ ...ऋग्वेद १. ५ ० .४
अर्थात् हे सूर्य, तुम तीव्रगामी एवं सर्वसुन्दर तथा प्रकाश के दाता और जगत् को प्रकाशित करने वाले हो।
Swift and all beautiful art thou, O Surya (Surya=Sun), maker of the light, Illuming all the radiant realm.
उपरोक्त श्लोक पर टिप्पणी/भाष्य करते हुए महर्षि सायण ने निम्न श्लोक प्रस्तुत किया
तथा च स्मर्यते योजनानां सहस्त्रं द्वे द्वे शते द्वे च योजने एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तुते॥
-सायण ऋग्वेद भाष्य १. ५ ० .४
अर्थात् आधे निमेष में 2202 योजन का मार्गक्रमण करने वाले प्रकाश तुम्हें नमस्कार है
[O light,] bow to you, you who traverse 2,202 yojanas in half a nimesha..
-Sage Sayana 14th AD
yojana and nimesha are ancient unit of distance and time respectively.
उपरोक्त श्लोक से हमें प्रकाश के आधे निमिष में 2202 योजन चलने का पता चलता है अब समय की ईकाई निमिष तथा दुरी की ईकाई योजन को आधुनिक ईकाईयों में परिवर्तित कर सकते है ।
किन्तु उससे पूर्व प्राचीन समय व् दुरी की इन ईकाईयों के मान जानने होंगे .
निमेषे दश चाष्टौ च काष्ठा त्रिंशत्तु ताः कलाः |
त्रिंशत्कला मुहूर्तः स्यात् अहोरात्रं तु तावतः || ........मनुस्मृति 1-64
मनुस्मृति 1-64 के अनुसार :
पलक झपकने के समय को 1 निमिष कहा जाता है !
18 निमीष = 1 काष्ठ;
30 काष्ठ = 1 कला;
30 कला = 1 मुहूर्त;
30 मुहूर्त = 1 दिन व् रात (लगभग 24 घंटे )
As per Manusmriti 1/64 18 nimisha equals 1 kashta, 30 kashta equals 1 kala, 30 kala equals 1 muhurta, 30 muhurta equals 1 day+night
अतः एक दिन (24 घंटे) में निमिष हुए :
24 घंटे = 30*30*30*18= 486000 निमिष
hence, in 24 hours there are 486000 nimishas.
24 घंटे में सेकंड हुए = 24*60*60 = 86400 सेकंड
86400 सेकंड =486000 निमिष
अतः 1 सेकंड में निमिष हुए :
1 निमिष = 86400 /486000 = .17778 सेकंड
1/2 निमिष =.08889 सेकंड
in 1/2 nimisha approx .08889 seconds
अब योजन ज्ञान करना है , श्रीमद्भागवतम 3.30.24, 5.1.33, 5.20.43 आदि के अनुसार
1 योजन = 8 मील लगभग
2202 योजन = 8 * 2202 = 17616 मील
As per Shrimadbhagwatam 1 yojana equals to approx 8 miles.
सूर्य प्रकाश 1/2 (आधे) निमिष में 2202 योजन चलता है अर्थात
.08889 सेकंड में 17616 मील चलता है ।
.08889 सेकंड में प्रकाश की गति = 17616 मील
1 सेक में = 17616 / .08889 = 198177 मील लगभग
Speed of light in vedas 198177 miles per second approximately .
आज की प्रकाश गति गणना 186000 मील प्रति सेकंड लगभग
In morden science , its 186000 miles per second approximately.

Sunday, 18 June 2017

क्या आर्य विदेशी है ? नहीं

क्या आर्य हिन्दू विदेशी है ?
उत्तर : नहीं
एशिया और यूरोप को अंग्रेजी में यूरेसिया हिंदी (आर्याव्रत) कहते है |
यूरेशिया में एशिया |
एशिया में भारत  है | कावेरी नदी भारत में है |

आर्य का जन्म कावेरी नदी के किनारे गोंडवाना लैंड के पास हुआ !
यूरेसिया (यरोप+एशिया) | एशिया में भारत |
भारत में कावेरी नदीके गोंडवाना लैंड में जन्मे आर्य स्वदेशी है |
कावेरी नदी के किनारे से ही मानव (मनु के संतान - मनुष्य) सभ्यता का जन्म और विकास हुआ था |

आर्य शब्द का अर्थ विशिष्ट तथा श्रेष्ठ गुण जन है। आर्यो के आक्रमण से संबंद्धित सिद्धांत औपनिवेशिक भारत के दुष्परिणामों में से एक है। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्रायोजित विद्वानों ने बलपूर्वक आर्य शब्द के जातीय संदर्भ ढूंढ़कर द्रविड़ के सामने खड़ा किया। उत्तर-दक्षिण तथा निम्न उच्च आदि विवाद भारत की अखंडता के लिए खतरा हैं।

हिंदी शब्द के अंग्रेजी और संस्कृत में समानार्थक शब्द
पृथ्वी:
अर्थ EARTH = पृथ्वी
आर्याव्रत :
यूरेसिया (यरोप+एशिया) EURASIA ( Europe + Asia )  = आर्याव्रत
जम्बू द्वीप :
एशिया  =  जम्बू द्वीप
भारतबर्ष:
ईरान + अफगानिस्तान+पाकिस्तान+नेपाल +भारत +म्यांमार +भूटान +बंग्लादेश + श्रीलंका = भारतबर्ष
हिन्दुस्तान
इंडिया = हिन्दुस्थान

क्या ब्राह्मण ने जाती प्रथा प्रारम्भ किया ?
उत्तर : नहीं
राजा भोज ने हिन्दू को कार्य बांटा था जिसे मुगलो ने चालाकी से जाती प्रथा बना दिया | अंग्रेज , कांग्रेस और वामपंथी बुद्धिजीवी ने जहर घोल कर विषाक्त कर दिया |
क्या आप बता सकते हो की आप के पूर्वज किस जाती से थे शायद नहीं मुग़ल के पहले जाती प्रथा नहीं थी | एक बात तो पक्की है आप के पूर्वज वीर हिन्दू थे कायर नहीं और गुलाम नहीं | अरब वाले सिर्फ कनवर्टेड मुस्लिम को गुलाम मानते है | भारत में बहुत सारे राज्य थे | जिसमे मुग़ल का शासन नहीं था | स्वतंत्र थे | कभी मुग़ल की गुलामी नहीं की | जाती प्रथा के लिए सब जिम्मेवार है | केवल ब्राह्मण नहीं | छुवा छूट सिर्फ ब्राह्मण नह करते थे | सब हिन्दू करते थे | कसाई और गंदगी पेशा के कारन सब छुवा छूत करते थे | मुग़ल ने इनको प्रताड़ित करके चंवर वंशीय को चमड़ा छिलवा कर अपमानित किया | हिन्दू तो चमड़े का इस्तेमाल नहीं करते थे | खड़ाऊं करते थे | मंदिर में आज भी बेल्ट जूता खोल के जाते है |

औरंगजेब का अत्याचार की कोई सीमा नही था | उसका अत्याचार दिनों दिन बढ़ता गया | वह रोज ढाई मन जनेऊ न जला लेता था तब तक उसे नींद नहीं आती थी l
औरंगजेब अपने शासन के आखिरी बर्षो में रोज ढाई मन जनेऊ जला कर ब्राह्मण क्षत्रिय को गुलाम बना कर अछूत(मैला चमड़ा) काम करवाता था |
आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं की ढाई मन जनेऊ एक दिन में जलाने से कितने हिन्दुओं को मारा सताया जाता होगा और कितने बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन किया जाता होगा, कितनी ही औरतों का शारीरिक मान मर्दन किया जाता होगा और कितने ही मन्दिरों तथा प्रतिमाओं का विध्वंस किया जाता होगा |वर्तमान के पाकिस्तान ईरान अफगानिस्तान बंग्लादेश जो भारत के अंग थे मुगलो ने अत्याचार कर धर्मपरिवर्तन करवाया था | आततायी औरंगजेब प्रतिदिन शाम में ढाई मन जनेऊ जलाते थे | जनेऊ पहनने पर यातना देते थे | इसलिए उपनयन संस्कार बंद और मैला चमड़ा के कारोबार में ब्राह्मणो वैश्यों क्षत्रियो को लगाया गया जिससे अछूत बने | हमारे वीर पूर्वज हिन्दू ( ब्राह्मण क्षत्रिय वैस्य शूद्र ) अछूत बने लेकिन धर्म नहीं त्यागा |
Eurasia /jʊˈrʒə/ is a combined continental landmass of Europe and Asia.[2][3][4] The term is a portmanteau of its constituent continents (Europe & Asia). Located primarily in the Northern and Eastern Hemispheres, it is bordered by the Atlantic Ocean to the west, the Pacific Ocean to the east, the Arctic Ocean to the north, and by Africa, the Mediterranean Sea, and the Indian Ocean to the south.[5] The division between Europe and Asia as two different continents is a historical and cultural construct, with no clear physical separation between them; thus, in some parts of the world, Eurasia is recognized as the largest of five or six continents.[4] In geology, Eurasia is often considered as a single rigid megablock. However, the rigidity of Eurasia is debated based on the paleomagnet data.[6][7]

Eurasia (orthographic projection).svg
Area55,000,000 km2(21,000,000 sq mi)
Population5,132,000,000 (on 2015, 1 July) [1]
Population density93/km2 (240/sq mi) 3 thousands cunta
DemonymEurasian
Countries~90 countries
Dependencies9 dependencies
Time zonesUTC−1 to UTC+12

कश्मीर में पत्थरबाज इस्लामिक झंडा लेके प्रदर्सन करते है | वामपंथी सेक्युलर कांग्रेस समर्थन करती है | सात लाख ब्राह्मण पंडित मार दिए | कोई मानवाधिकार कोई कानून काम ना आया | मतलब साफ़ है | ये क्या चाहते है | भारत में शरिया लागू हो और हिन्दू मारा जाय |
पाक ,गद्दार और सेक्युलर एक साथ मिलकर युद्ध कर रहा है | वामपंथी और कोंग्रेसी जहाँ सत्ता में है वहां हिन्दू को मार रहे है |
जिस प्रकार कल गद्दार कौम ने बता दिया वो भारत को हारते हुए देखना चाहते है |
वामपंथी ने जिस प्रकार माओवाद नक्सलवाद जैसे बहुत सारे उग्रवादी संगठन बनाये है ये सिर्फ आने वाले खतरे के संकेत है |
कश्मीर केरल बंगाल ह्यदेरबाद JNU यादवपुर में जिस प्रकार पाकिस्तान के झंडे फहराए जाते है | भारतीयों को गाली और तिरंगा राष्ट्रगीत राष्ट्रगान अपमान होता है | ये खतरे के संकेत है |
हमें लगता है चीन पाकिस्तान से जब लड़ाई होगी | #गद्दार कौम तलवार लेके हिन्दुओ का सर कलम करने में देर नहीं करेगी |
#गद्दारो कायर सेक्युलरों को देख कर लगता है | हिंदुस्तान जल्द ही गुलाम होगा |
अगर आज भी नहीं जागे तो हमारे आने वाली नस्ले पाकिस्तान का कौमी नारा लगा लगा के ख़ुदकुश हमलावर बनेंगे | हिंदुस्तान बर्बाद होगा एक भी हिन्दू नहीं बचेगा | सीरिया की तरह हालात होंगे | उसके जिम्मेवार होंगे हम |
जय हिन्द भारत माता की जय |

33 कोटी देवी देवता हैँ

33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।
कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,
कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।
हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-
12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

सनातन धर्म खतरे में

भारत में मात्र २% ब्राह्मण है क्या इनका अंत करने से शांति आएगी|
उत्तर : नहीं
ईरान अफगानिस्तान पाकिस्तान बंग्लादेश में पंडित पुजारी का कत्लेआम हुआ |
पाकिस्तान बंग्लादेश अफगानिस्तान इंडोनेसिया थाईलैंड में ब्राह्मण के अंत के साथ ही हिन्दू का अंत हो गया अशांति है |


केरल के ब्राह्मण का अंत होने के बाद , आसाम में पंडित कश्मीर में पंडित का कत्ले आम हुआ
कश्मीर केरल बंगाल असम ह्यदेरबाद में ब्राह्मण का अंत किया जा रहा है | त्राहि त्राहि मची है |
भारत में १००० ब्राह्मण में सिर्फ २ ब्राह्मण पंडित और पुजारी है| बाकी अलग पेशा में हैजिस दिन ब्राह्मण का अंत हुआ सनातन धर्म का अंत होगा और विश्व पूर्ण रूप से इलुमिनाटी का गुलाम हो जायेगा |
राम नाम सत्य है |

क्या आर्य हिन्दू विदेशी है ?
उत्तर : नहीं
एशिया और यूरोप को यूरेसिया कहते है |

भारत एशिया में है | कावेरी नदी भारत में है |

आर्य का जन्म कावेरी नदी के किनारे गोंडवाना लैंड के पास हुआ !

कावेरी नदी के किनारे से ही मानव (मनु के संतान - मनुष्य) सभ्यता का जन्म और विकास हुआ था |


यूरेसिया(यरोप+एशिया) | एशिया में भारत |

भारत में कावेरी नदीके गोंडवाना लैंड में जन्मे आर्य स्वदेशी है |

क्या ब्राह्मण ने जाती प्रथा प्रारम्भ किया ?

उत्तर : नहीं
राजा भोज ने हिन्दू को कार्य बांटा था जिसे मुगलो ने चालाकी से जाती प्रथा बना दिया | अंग्रेज , कांग्रेस और वामपंथी बुद्धिजीवी ने जहर घोल कर विषाक्त कर दिया |
क्या आप बता सकते हो की आप के पूर्वज किस जाती से थे शायद नहीं मुग़ल के पहले जाती प्रथा नहीं थी | एक बात तो पक्की है आप के पूर्वज वीर हिन्दू थे कायर नहीं और गुलाम नहीं | अरब वाले सिर्फ कनवर्टेड मुस्लिम को गुलाम मानते है | भारत में बहुत सारे राज्य थे | जिसमे मुग़ल का शासन नहीं था | स्वतंत्र थे | कभी मुग़ल की गुलामी नहीं की | जाती प्रथा के लिए सब जिम्मेवार है | केवल ब्राह्मण नहीं | छुवा छूट सिर्फ ब्राह्मण नह करते थे | सब हिन्दू करते थे | कसाई और गंदगी पेशा के कारन सब छुवा छूत करते थे | मुग़ल ने इनको प्रताड़ित करके चंवर वंशीय को चमड़ा छिलवा कर अपमानित किया | हिन्दू तो चमड़े का इस्तेमाल नहीं करते थे | खड़ाऊं करते थे | मंदिर में आज भी बेल्ट जूता खोल के जाते है |
ब्राह्मण को जातिवाद ,कट्टरवाद कभी विदेशी बता कर नष्ट करना चाहते है |
इल्लुमिनाटी ने विश्व के सारे धर्म ख़त्म कर दिए सिर्फ सनातन बचा है |
इसलिए वो किसी प्रकार ब्राह्मण का अंत चाहते है|
इल्लुमिनाती ही ब्राह्मण का सबसे बड़ा दुश्मन है

Saturday, 17 June 2017

मुसलामानों की जाति

मुसलामानों में 300 से अधिक जातियाँ हैं।
1-महकमिय्या 2-अजराकिया 3- आयुजि 4-नजरात 5-असफरिया 6-अबाजिया 7-अहसाम्य्या 8-बहशिस्यह 9-नागलियाह 10-अजजदह 11-अख्वास्या 12-शैबानीयह्ह् 13-मकराम्या 14-वासलिय्या 15- हज़ेलिया 16-नजामिया 17-अस्वारिया 18-अस्काफिया 19-मज्वारिया 20-बशरिया 21-अस्मरिया 22-हसामिया 23-साल्जियह 24 हाबतिया 25-मुकमरिया 26-समामिया 27-जाख्तिया 28-हरीबा 29-जाफरिया 30-बहशमिया 31-जबानिया 32-कबेया 33-ख्यातेया 34-गरसानिया 35-सोबानिया 36-सोबेया 37-अहदया 38-बर्गोसिया 39-नाफेरानिया 40-ब्यानिया 41-मुगिरिया 42-कामलिया 43-मंसूरिया 44-खताबिया 45-अजआबिया 46-जमिया 47-मुस्तदरिकिया48-मुजसामिया 49-करामिया 50-जाहिमिया

51-हनफिया 52-मालकिय्या 53-शाफ्या 54-हम्बिलिया 55-सूफिया 56-दावड़िया 57-सबाइया 58-मफज़जलिया 59-जारिया 60-इशहकिया 61-शेतानिया 62-मफुजिया 63-कसानिया 64-रजानिया 65-इस्माइल्लिया66-नासिरिया 67-जैदिया 68-नारुसिया 69-अहफटया 70-वाकफीफीया 71-गलात 72-हशविया 73-उल्वेया 74-अबड़िया 75-शमसिया 76-अब्बासिया 77-इमामिया 78-नावस्या 79-तनासुख्या 80-मूर्तजिया 81-राजइय्या 82-खलिफिया 83-कंजिया 84-हज़तरिया 85-मोतजलिया 86-मैमुनिया 87-अफालिया 88-माबिया 89-तारक्या 90-नजमैमुनिया 91-हज़तिया 92-कंदरिया 93-अहरिया 94-वहमिय्या 95-मोटलिया 96-मुतरआ बसिया 97-मुतरफिया 98-मखलुखिया 99-मुतराफिया 100-वबरिया

101-मजिया 102-शाबाइया 103-अमालिया 104-मुस्तसिया105-मुशबह्य्या 106-सालमिया 107-कास्मिया 108-कनामिया 109-खारिजया 110-तर्किया 111-हज़ीमिया112-दहरिया 113-साआल्बिया 114-वहाबिया 115-नसारिया 116-मझुलिया 117-सलया 118-अख़बसया 119-बहसिया 120-समराख्या 121-अतबिया 122-गालिया 123-कतएया 124-कुर्बिया 125-मुहमदीया 126-हसनिया 127-क़राबतइया 128-मुबारिकिया 129-श्मतिया 130-अमारिया 131-मख्तुरिया 132-मोसुमिया 133-नानेया 134-तयारिया 135-यतरायह 136-सैरफिया 137-सरीइयह 138-जारुदिया 139-सुलेमनिया 140-तबारिया 141-नइमया 142-याक़ूबिया 143-शमरिया 144-युनानिया 145-बखारिया 146-गेलिन्या 147-शाएबिया 148-समहाज़िया 149-मरसिया 150-हासमिया

151-खरारिया 152-क्लाबिया 153-हालिया 154-बाटनिया155-अबाजिया 156-ब्राह्मिया 157-अशअरिया 158-सोफ्सतैया 159-फिलसफिया 160-समिनिया 161-मशाईन 162-अश्राकिन 163-अजुसियह 164-उम्बिया 165-वजीदीया 166-अलीळालाहिया167-सादकिया 168-फुरकानिया 169-फरुकिया 170-शेखिय्या 171-शम्ससया 172-सम्मिस्या 173-फरकिया 174-नक़्शबंदिया 175-कादरिया 176-नेचीरिया 177-मिजाइय्या 178-आगखानिया 179-शहर बदीया 180-चिश्तिया 181-क्रानिया 182-नजदीया 183-बाबिया184-मवाहदीया वहाबी 185-राफजिया 186-नजिया 187-जस्तीया 188-इबारिया 189-जबरिया 190-टबरिया 191-सल्फिया 192-अकलिया 193-सफत्या 194-तकलिया 195-मुट्सफिया 196-हमाओसत 197-शमाफिया 198-हफ्तइमामिया199-हश्तइमामिया200-अशन अशारिया

2०1-अखबारिय्यिन 202-मुतकल्लमिन 203-मुत्सररइन 204-रोशनियां 205-कोकबिया 206-तबकुमिया 207-अर्शेआसेयानी 208-तातिलिया 209 अन्सारिया 210-रखबिया 211-रहमानिया 212-रुहानिया 213-अन्नजिया 214-हबिबिया 215-अजिया 216-हबिरिया 217-सक्तिया 218-जनिदिया 219-जबिया 220-आरहिमिया 221-क्लद्रिया 222-फिरडोमिया 223-मदारिया 224-रजजिया 225-सफाइय्या 226-खाकिया 227-वादिया 228-तशनिया 229-आविया 230-तैकुरिया 231-दवाया 232-शैतारिया 233-तबकानिया 234-सय्यद जमालुद्दीन 235-मतबरिया 236-आर्गुनिया 237-आल्याया 238-गजिरुनिया 239-जाहडिया 240-तोबिया 241-कजिया 242-तशिरिया 243-हलालिया 244-नूरिया 245-एदुसिया 246-यस्विया 247-रफइय्या 248-मोइन्या 249-शकरगजिया 250-महबुने इलहिया

251-महमुदिया 252-फखरुदिनिया 253-नुरे मुहामादिया 254-वुनसुया 255-अल्लाहबक्षिया 256-हाफजिया 257-खिजरुया 258-कर्मनिया 259-करिमियऑ 260-जलिलिया 261-जमालिया 262-कुडिसिया 263-साबरिया 264-मखदुमिया 265-हज़रूमिया 266-निजामिया 267-अबूलअलैया 268-हसमिया चितस्या 269-निजमहिरिया270-बखारिया 271-हमजआशाही 272-फखरिया 273-नायजिया274-जायइया 275-फक्रिया फरीदइया 276-शमशिया सुलमानिया 277-फखरिया सुलमानिया 278-सुदुशाही 279-रजाकिया 280-वहाविया 281-नोशाही 282-शय्येदशाही 283-हुस्सैनशाही284-कबिसिया 285-मुहम्मदशाही286-बहलोलशाही 287-हासशाही 288-सुदुशाही 289-मुकियशाही 290-महुवदशाही 291-कासिमशाही 292-नंतुल्लाहशाही 293-मिरशाही 294-सुफियाहमीडिया 295-कंमसिय्या 296-दोलशाही 297-रसुलशाही 298-सुहागशाही 299-सफबीय्या 300-लालशाही

301-बाजिया 302-बुखारिया 303-कर्मजहलि 304-हबिबशाही 305-मूर्तज़शाही 306-अब्दुलकरिमि307-इस्मैलशाही 308-हलिमशाही 309-रुजाकशाही 310-मिजाकशाही 311- संगरिया 312-अय्याजिया 313-नासिरिया

अब जातिगत नफरत इनमे क़ातिलाना है

Friday, 14 April 2017

वामपंथी कुत्तों के लिए घी

ये बात वामपंथी कुत्तों के लिए घी है| नहीं पचेगा |

डा. अम्बैडकर ने अपनी पुस्तक** शूद्र कौन** में लिखा कि कोई भी विदेशी नहीं है ,
ब्राहमण छत्रिय वैश्य शूद्र चारों ही इस देश के मूल निवासी है. उन्होने अपनी इस पुस्तक
में शूद्रों के पूर्वजो को छत्रिय बताया . प्रस्तुत है अम्बेडकर की इस पुस्तक के कुछ अंश--
डा अम्बेडकर लिखते हैं कि ," मेरी अपनी गवेषणा के आधार पर प्रतिपादित मत निष्कर्ष
ही इस पुस्तक की विशेषतायें हैं . इस कृति में दो विशेष प्रश्न उठाये गये हैं (१) शूद्र कौन थे
तथा(२) वे प्राचीन आर्यो के समाज का चौथा वर्ण क्यो और कैसे बने . संछेंप में मेरा मत
निम्न प्रकार है---(१)-- शूद्र आर्यो की जातियों में शूर्यवंशी थे (२) एक समय था जब
आर्यो में केवल तीन ही वर्ण थे - ब्राहमण छत्रिय वैश्य . शूद्रों का प्रथक वर्ण न था . वे
आर्यो के द्वितीय वर्ण छत्रिय वर्ण का ही एक अंग थे . शूद्र राजाओ ओर ब्राहमणों में
निरन्तर संघर्ष चला और ब्राहमणो को शूद्रों के वीभत्स अत्याचार सहने पडे (५) शूद्रों के
दमन से आक्रान्त ब्राहमणों ने घृणावश शूद्रों का उपनयन बन्द कर दिया. उपनयन विरोध
से शूद्रों का सामाजिक पराभाव हुआ , वे सामाजिक स्तर पर इतने पतित हुये कि वैश्यों
से नीचे एक और वर्ण -- चौथा वर्ण-- बनना पडा

बंगलादेश के अल्पसंख्यको को जिहादियो के सामने गोश्त की तरह परोसने वाला और कोई नहीं बाबा भीम राव अम्बेडकर जी का राजनितिक गुरु था योगेंद्र नाथ मण्डल , इसी मण्डल की वजह से आज का बंगलादेश वजूद में आया और 1947 से पहले के 44% जनसंख्या वाले बंगलादेशी अल्पसंख्यक आज 8% रह गए है ,सिर्फ इन्ही महान कुंठित दलित चिंतक की वजह से जिनका नाम था योगेंद्र नाथ मण्डल,
और मजे की बात यही योगेन्द्रनाथ मण्डल 1972 के बाद अपने ही बनाये बंगलादेश से लात मारकर बाहर कर दिए गए और इस कुंठित व्यक्ति ने अपना बाकी का बचा हुआ जीवन भारत में कहि कोने में बैठकर व्यतीत करना पड़ा इनको मरते दम तक अपनी गलती सताती रही और आखरी समय पर इनके जीवन के महत्वपूर्ण यही दो शब्द थे , #इस्लाम_किसीका_सगा_नहीं।।।।

भारत में अगर आरक्षण की रोटी अगर हिन्दू सवर्णो ने भीख दिया है तो अधिकार समझने लगे | जब पाकिस्तान में मुसलमानो ने इनको अधिकार तो दूर जब गाजर मूली की तरह काटा तो नसीब समझने लगे |
क्या मिला पाकिस्तान में मुसलमानो के साथ मिलकर तुमने ही तो लड़ाई लड़ी थी | जहा खाना मिलता है वही जहर उगलते हो |
डूब मरो ! अमेरिकी रुसी बम हलाल है भारत में खाना पानी मिलता है तो वन्दे मातरम हराम है |